The Rouser : नेपथ्य की आवाज़

भारत एक तेज़ी से बदलता हुआ देश है। एक ओर हमने विज्ञान, तकनीक और व्यापार में बड़ी कामयाबी हासिल की है, तो दूसरी ओर समाज में असमानता, अन्याय और भेदभाव भी लगातार बढ़ रहे हैं। आज भी करोड़ों लोग अपने बुनियादी अधिकारों – जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे समय में बहुत ज़रूरी हो गया है कि आम नागरिकों को समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति से जुड़ी सही और साफ़ जानकारी मिले। इसी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए The Rouser मीडिया पोर्टल की शुरुआत की गई है। यह एक स्वतंत्र डिजिटल मंच है, जिसका उद्देश्य – भारत को एक समावेशी, न्यायपूर्ण और सच्चे लोकतंत्र की दिशा में ले जाना है।

The Rouser मानता है कि जागरूक नागरिक ही किसी देश की असली ताकत होते हैं। लेकिन आज हमारे सामने एक गंभीर चुनौती है – सही जानकारी तक पहुंच। जो मीडिया जनता की आवाज़ बनने के लिए था, वही अब कॉर्पोरेट और सत्ता के हाथों की कठपुतली बनता जा रहा है। आज भारत के अधिकांश बड़े समाचार चैनल और अखबार कुछ गिनी-चुनी कंपनियों के स्वामित्व में हैं, जिनका मकसद सच्चाई दिखाना नहीं बल्कि मुनाफा कमाना है। 2023 की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत के 80% न्यूज़ चैनल कुछ बड़े कॉर्पोरेट समूहों के नियंत्रण में हैं। वहीं, लोकनीति-सीएसडीएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 62% लोग मानते हैं कि मीडिया अब स्वतंत्र नहीं रहा। कई बार मुख्यधारा मीडिया जनता को भटकाने के लिए झूठी या अधूरी खबरें दिखाता है। असली मुद्दे – जैसे बेरोज़गारी, महंगाई, महिला-सुरक्षा, शिक्षा, किसान और मज़दूरों के अधिकार, दलित और आदिवासी समुदायों की स्थिति – टीवी की बहसों और अख़बारों के पहले पन्ने से ग़ायब होते जा रहे हैं।

The Rouser एक ऐसा मंच है जो बिना किसी दबाव या डर के काम करेगा। हमारा मकसद – आम लोगों तक सच्ची, सरल और तथ्य-आधारित जनपक्षीय जानकारी को पहुँचाना है। हम उन मुद्दों पर बात करेंगे जो वाकई ज़रूरी हैं, लेकिन जिन पर चर्चा नहीं होती। हम जाति, वर्ग, लिंग, धर्म और क्षेत्र के आधार पर हो रहे भेदभाव को उजागर करेंगे। हम अर्थव्यवस्था की जटिल बातों को आसान भाषा में समझाएंगे, ताकि गाँव के किसान से लेकर स्कूल के छात्र तक, हर कोई समझ सके कि कौन सी नीतियाँ उनके जीवन को कैसे प्रभावित कर रही हैं। हम राजनीति पर भी पैनी नज़र रखेंगे, सरकार से सवाल पूछेंगे और यह समझाने की कोशिश करेंगे कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी क्यों ज़रूरी है।

The Rouser एक द्विभाषी न्यूज़ पोर्टल के साथ ही वाद-विवाद-संवाद का एक मंच है जो भारत के किसान, मजदूर एवं शोषितों के हक़ एवं अधिकार की पक्षधरता के लिए समर्पित है। हमारा विश्वास है कि सूचना एवंं संचार तकनीकि के युग में सूचना एवं जानकारी ही ताकत है। जब लोगों की सूचनाओं तक पहुँच होगी तो वे देश-दुनिया के बारे में जागरूक होंगे, तभी वे अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाएंगे, सवाल पूछेंगे और एक बेहतर समाज की ओर कदम बढ़ाएंगे। वैश्वीकरण के दौर में हम आपको सशक्त बनाना चाहते हैं – ताकि आप सिर्फ़ मूकदर्शक न रहें, बल्कि बदलाव का हिस्सा बनें।

The Rouser के साथ जुड़िए, अपने विचारों को प्रेषित करिये, हमारी खबरों को पढ़िये और शेयर करिए। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले भारतीय मीडिया के वर्तमान चरित्र को देखते हुए डॉ. अंबेडकर की चिंताएँ सही साबित हो रहा हैं। सत्ता एवं निजी पूंजी के गठजोड़ के चलते भारतीय मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा जनता के जिन मुद्दों को दबा दिया या दरकिनार कर दिया जाता है उसे The Rouser के मंच पर जगह मिलेगी। यह नेपथ्य के लोगों की खबरों एवं विचारों को प्रोत्साहित करने का समावेशी प्रयास है। आप निडरता के साथ अपनी बात कहिए और लोकतंत्र में अपने मत-विमत को रखने की आज़ादी को हर क्षेत्र में दावा करिये। भारतीय समाज में संवैधानिक मूल्यों को स्थापित करने के लिये वाद-विवाद-संवाद की परंपरा को स्थापित करने के लिए आवाज़ को बुलंद कीजिए।

संपादक की कलम से …

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