नेशनल हेराल्ड केस मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा चार्जशीट दायर करने की वजह से भारत की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। मौजूदा राजनीतिक चर्चा की वजहें सिर्फ आजादी के दौर के एक मीडिया हाउस के वित्तीय लेनदेन से जुड़ी नहीं है, बल्कि इस मामले के केंद्र में है कांग्रेस पार्टी और खासकर गांधी परिवार जिनको कानूनी दायरे में खड़ा किया गया है। हालांकि चार्जशीट में कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा और राजीव गांधी फाउंडेशन के ट्रस्टी सुमन दुबे को भी अभियुक्त बनाया गया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ ईडी ने इस मामले से जुड़ी जाँच के बाद कांग्रेस के इन दो वरिष्ठ नेताओं के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाखिल किया है। विशेष जज विशाल गोग्ने ने 9 अप्रैल को दायर इस चार्जशीट का संज्ञान लिया और मामले की सुनवाई की तारीख़ 25 अप्रैल तय की है।
क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
नेशनल हेराल्ड, ‘एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड’ (AJL) का एक अख़बार था जिसकी स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।इस अख़बार का मालिकाना हक़ ‘एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड’ के पास था जो हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘क़ौमी आवाज़’ नाम से दो अन्य अख़बार भी छापा करती थी। नेशनल हेराल्ड का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के विचारों को प्रसारित करना था। आज़ादी के बाद साल 1956 में एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड को ग़ैर व्यावसायिक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया और कंपनी एक्ट की धारा 25 के अंतर्गत इसे करमुक्त भी कर दिया गया। लेकिन समय के साथ यह अख़बार बंद हो गया और इसकी परिसंपत्तियाँ (properties) कई शहरों में रह गईं, जिनकी कीमत आज करोड़ों में आंकी जा रही है।
वर्ष 2008 में यह अखबार बंद है गया। ‘एजेएल’ के सभी प्रकाशनों को निलंबित कर दिया गया और कंपनी पर 90 करोड़ रुपये का क़र्ज़ भी चढ़ गया। 2008 में कांग्रेस पार्टी ने ‘एजेएल’ को 90 करोड़ रुपये का ऋण दिया। बाद में 2010 में कांग्रेस नेतृत्व ने ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक नई ग़ैर व्यावसायिक कंपनी स्थापना की गयी, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया। इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मिल्कियत क्रमशः 38-38% थी तथा बाकी 24 प्रतिशत शेयर अन्य निदेशकों के पास था। आरोप है कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने मात्र 50 लाख रुपये में एजेएल काअधिग्रहण कर लिया। इससे यंग इंडियन को AJL की संपत्तियों पर नियंत्रण मिल गया। आरोप है कि इस पूरे लेन-देन के ज़रिए गांधी परिवार ने AJL की संपत्तियों पर नियंत्रण पा लिया।
केस पर कानूनी कार्यवाई
भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 2012 में अदालत में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें गांधी परिवार पर धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप लगाए गए।उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ ने सिर्फ़ 50 लाख रुपयों में 90.25 करोड़ रुपये वसूलने का उपाय निकाला जो ‘नियमों के ख़िलाफ़’ है। अपनी याचिका के जरिए आरोप लगाया कि 50 लाख रुपये में नई कंपनी बनाकर ‘एजेएल’ की 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति को ‘अपना बनाने की चाल’ चली गई।

साल 2022 में कंपनी में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के लिए ईडी ने केस दर्ज किया था और सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पूछताछ के लिए समन भी किया था। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग क़ानून (पीएमएलए) के सेक्शन 8 के नियम 5 (1) के तहत नेशनल हेराल्ड की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू की। इसके तहत वो जब्त की गई संपत्तियों पर कब्जा लेने की प्रक्रिया भी शुरू किया। इस कार्रवाई के मुताबिक़ संपत्ति पर काबिज़ लोगों को संपत्ति और इसका परिसर खाली करने को कहा गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में नवंबर 2023 में AJL और यंग इंडियन की 751.9 करोड़ रुपये की संपत्तियाों को जब्त किया।
पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रियाएं एवं आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। पार्टी का कहना है कि यंग इंडियन एक गैर-लाभकारी कंपनी है और गांधी परिवार को इससे कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं हुआ। पार्टी के नेताओं का कहना है कि भाजपा नेतृत्व गांधी परिवार की लोकप्रियता से डरता है, इसलिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहा है।
लोकसभा सांसद तथा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, “मैं मोदी जी से नहीं डरता, चाहे ईडी भेजें या जेल में डालें, मैं सच्चाई के साथ खड़ा हूं।”
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने भी भाजपा सरकार पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया और कहा कि यह मामला सिर्फ राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ED की कार्रवाई भाजपा की चुनावी हार के डर को दर्शाती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे “छोटी बदले की राजनीति” करार दिया।
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ED की कार्रवाई को “राजनीति में एक नया निम्न स्तर” बताया। उन्होंने कहा कि शेयरधारक कंपनी की संपत्ति के मालिक नहीं होते और यंग इंडियन एक गैर-लाभकारी कंपनी है, इसलिए संपत्ति की जब्ती का कोई कानूनी आधार नहीं है।
नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर कई विपक्षी दलों ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है। प्रमुख विपक्षी दलों जैसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), शिवसेना, राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (RSP), वीसीके, एनसीपी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) और एमडीएमके ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया है कि मोदी सरकार ने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच एजेंसियों का “दुरुपयोग” किया है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने ED की कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया और कहा कि यह विपक्ष को डराने की कोशिश है। इस संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि विपक्षी दल इस तरह की कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट हैं ।
वहीं दुसरी तरफ सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा इस मुद्दे को एक अवसर की तरह संसद लेकर हर राजनीतिक मंचों तक जोर-शोर से उठा रही है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि गांधी परिवार ने अपने राजनीतिक ताकत का दुरुपयोग कर राष्ट्रीय संपत्ति को निजी हाथों में लेने की कोशिश की।
भाजपा नेता एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि, “कुछ परिवारों ने भारत की संस्थाओं को अपनी निजी संपत्ति समझ लिया।”
पार्टी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गांधी परिवार ने स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और कांग्रेस पार्टी की संपत्तियों को अपने निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार को अपने “पापों” की कीमत चुकानी होगी।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को “बेलबॉय” कहकर संबोधित किया और कांग्रेस नेतृत्व को “भ्रष्टाचार में डूबा परिवार” बताया।
संक्षेप में: केस की मुख्य बातें
- नेशनल हेराल्ड अख़बार की बंद पड़ी संपत्तियों पर गांधी परिवार के नियंत्रण का आरोप।
- यंग इंडिया कंपनी के ज़रिए संपत्तियों को हड़पने का आरोप।
- भाजपा का गांधी परिवार पर तीखा हमला, “भ्रष्टाचार का प्रतीक” करार।
- कांग्रेस की सफाई: “राजनीतिक बदले की भावना”, “लोकतंत्र का हनन”।
- ईडी की पूछताछ, जांच एजेंसियों की सक्रियता जारी।
कांग्रेस का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने देशभर में राज्य स्तर पर जोरदार प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ईडी और केंद्र सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और पुतले जलाए। सभी राज्यों में कांग्रेस के सीनियर नेता, विधायक, सांसद, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को मिलकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किए।
