डॉ. मुलायम सिंह – नमस्कार दोस्तों मैं आया हूं बुंदेलखंड के जालौन जिले में, अभी एक ऐसी सख्शियत से बात कर रहा हूं जिन्होंने नेताजी मुलायम सिंह यादव के साथ काम किया एवं उनके राजनीतिक सहयोगी रहे हैं। उनकी राजनीति को यहां जमीन पर उतारने, समर्थन करने और हर तरह से उनकी मदद करते रहे हैं। हमारे बीच सूरज सिंह यादव जी हैं। एक बार अपना परिचय दे दीजिए।
सूरज सिंह यादव – मैं सूरज सिंह यादव हूँ, जिला जालौन, तहसील कोंच के हरदुआ गांव का रहने वाला हूँ। मैं बार संघ का अध्यक्ष भी रह चुका हूं और इस समय अपने खेत में बैठे श्री मुलायम सिंह जी को उनके प्रश्नों का उत्तर दे रहा हूं।
डॉ. मुलायम सिंह – आप कब राजनीति में सक्रिय हुए ?
सूरज सिंह यादव – मैं राजनीत में 1978 में आया, वैसे इंटरेस्ट तो हमारा राजनीति में 1977 से ही रहा, जब से जनता पार्टी बनी लेकिन 1978 से हम लोग छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। मैं बुंदेलखंड के डिग्री कॉलेज के हॉस्टल में रहा करता था। वहीं से हमारे छात्र राजनीति का करियर शुरू हुआ, उस दरम्यान मेरी कई लोगों से मुलाकात हुई जिसमें चंद्रपाल सिंह यादव, जो हमारे जिला के रहने वाले हैं, वो भी बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज में एम.एससी. फस्ट इयर के स्टूडेंट थे और मैं बी.कॉम फाइनल इयर का स्टूड़ेंट था। वो हमारे सीनियर थे मैं उनका एक साल जूनियर था।
उन दिनों हमारे यहां छात्रों का चुनाव हुआ करते थे, तो उस समय एम.एससी. फैकल्टी का चुनाव हुआ, जिसमें महासचिव पद का चुनाव चंद्रपाल सिंह ने लड़ा और वो विजयी रहे। जिसमें हमारे बहुत से साथियों का सहयोग रहा। इस चुनाव के बाद यूथ फ्रंट का गठन हुआ जिसके संस्थापक थे दामोदरदास खेड़ा, सहयोगी शंभू राय, लक्ष्मी चंद जैन आदि अन्य लोग जो झांसी जिले के ही शहर से ताल्लुक रखते थे। उन लोगों से मिलकर हमारे यूथ फेडरेशन का गठन हुआ। उसमें हमने अपने ग्रुप से चुनाव लड़ाये, जिसमें हमारे रामपाल सिंह निरंजन, सुरेंद्र सिंह निरंजन और प्रदीप जैन आदित्य आदि प्रमुख चेहरे थे।
डॉ. मुलायम सिंह – क्या आपने भी कभी छात्र राजनीति में चुनाव लड़े ?
सूरज सिंह यादव – नहीं, मैंने कभी चुनाव नहीं लड़ा, कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ा। मैं एक बार लक्ष्मी चंद जैन, जो हमारे यहां अध्यक्ष बने थे उनकी कैबिनेट में मंत्री पद के दायित्व पर रहा हूँ।
डॉ. मुलायम सिंह – आप समाजवादी पार्टी या नेता जी की राजनीति से कैसे जुड़े ?
सूरज सिंह यादव – सन 1979 में जब चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री पद से हट गए, तब लोक दल था। चौधरी साहब ने लोक दल का गठन किया था, तो हम लोग सबसे पहले लोक दल से जुड़े थे। मैं और चंद्रपाल सिंह दोनों लोग लोक दल के सदस्य थे। उस समय लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे माननीय नेता जी (मुलायम सिंह यादव)। तो एकबार उरई के टाउन हाल में उनका आगमन हुआ, वहां हमारी उनसे पहली मुलाकात हुई। उन्होंने स्पेशली मुझको उरई के डाक बंगले में बुलाया और वहीं बैठकर उनसे लंबी बात हुई। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया, आश्वासन दिया कि किसी चीज के लिए मत घबराना, हम तुम्हारे साथ हमेशा खड़े रहेंगे। उन्होंने अपना टेलीफोन नंबर दिया तभी से हम माननीन नेताजी के साथ जुड़ गये और उनके अनुयायी बन गये।
डॉ. मुलायम सिंह – अच्छा जब आप लोग राजनीति में आए तो उस समय बुंदेलखंड में कौन लोग थे जिन्हें बड़ा नेता माना जाता था? जो आपके इलााके में राजनीति को नियंत्रित करते थे? मेरा मतलब कोई तो रहा होगा, जो नेताजी या आपके राजनीति में आने से पहले यहां की राजनीति में प्रभावी रहा होगा? जिसकों हटाकर बाद में नेताजी की राजनीतिक प्रभाव को स्थापित किया गया।
सूरज सिंह यादव – हमारे यहां उस समय कांग्रेस का रिजिम था। कांग्रेस में एक परमात्माशरण चतुर्वेदी साहब हुआ करते थे। वो कांग्रेस के जिले के संरक्षक थे, अध्यक्ष अपने ही किसी चेले को बना देते थे। पूरी राजनीति का केंद्र उन्हीं के इर्द-गिर्द केंद्रित था। कांग्रेस का वर्चस्व पूरे इलाके में था। वो किसी भी पिछड़े वर्ग के व्यक्ति को आगे बढ़ने नहीं देते थे। जो भी कोशिश करते था उसे अपनी लॉबी द्वारा दरकिनार कर देते थे। पिछड़ों को कोई संरक्षण देने वाला नहीें था। उन्हे हमेशा उपेक्षित एवं हतोत्साहित किया जाता था।

डॉ. मुलायम सिंह – आपके दौर में पिछड़े या दलित लोगों को समाज या राजनीति में किस तरह की चुनौतियौं का सामना करना पड़ता था?
सूरज सिंह यादव – आपको क्या क्या बताया जाए, वो दौर हम लोगों को लिए बहुत कठिन था। हम लोगों के पास कुछ नहीं था, न ही संसाधन थे और न ही कोई शासन-प्रशासन में सपोर्ट करने वाला था। कांग्रेस में सवर्ण नेताओं का वर्चस्व था। उन दिनों हमारे लोक दल में जो नेता आए, वो कांग्रेस से ही आए थे। उन दिनों एक इंद्रजीत सिंह यादव जी थे जो कांग्रेस से आए हुए नेता थे, जिनको माननीय नेताजी ने जिले का कार्यभार सौंपा और जिला अध्यक्ष बनाया। उनके नेतृत्व में हमारी राजनीति शुरू हुई। आगे चलकर बहुत लोग जुड़ते गए जिसमें हम्मीरपुर के राठ से महेद्र प्रताप यादव थे, एक एडवोकेट ज्ञान सिंह यादव थे जो लोकदल में 5 बार हम्मीरपुर के जिला अध्यक्ष थे। इन लोगों ने कांग्रेस के वर्चस्व को जमीनी स्तर चुनौती दी।
उस दौर में हम लोग जब कहीं भी धरना या विरोध करने जाते थे तो हमारे ऊपर प्रशासन द्वारा हमले कराए जाते थे। चुनाव के समय कांग्रेस के सवर्ण तथा जमींदार लोगों के गिरोह द्वारा हथियारों से हमले किये जाते थे। हमारे पास न संसाधन थे और न ही हथियार। प्रशासन भी उन्हीं लोगों का साथ देता था। हमारे ऊपर फर्जी मुकदमें कराये जाते। हम लोग किसी तरह बच-बचाकर राजनीति करते थे। चौधरी चरण सिंह और नेता जी के विचारों को लेकर आगे बढ़ रहे थे। उस दौर में उनका हर तरह से मुकाबला करना बहुत चुनौतीपूर्ण था।
लेकिन धीरे-धीरे हम लोगों ने अपने लोगों को संगठित किया, इधर-उधर से मांग-मांग कर संसाधन जुटाए और जमीन पर कांग्रेस के वर्चस्व को बहुत पीछे कर दिया और जिले के क्षितिज में हम लोग हावी होते गए। उसी दौर में उपचुनाव भी हुए, उपचुनाव में हमने दो सीटें, एक तो उपचुनाव हुआ था माधवगढ़ का, जिसमें स्वर्गीय दलगंजन सिंह साहब को विधायक का चुनाव जितवाया था, दूसरा चौधरी शंकर सिंह साहब विधायक लोक दल के थे, वो हमारे साथ पहले से ही थे। आगे हमारे जिले की राजनीति इन्हीं लोगों के नेतृत्व में आगे बढ़ी।
डॉ. मुलायम सिंह – आपका नेताजी से कितना घनिष्ठ ताल्लुक रहा है? या और कितने ऐसे लोग थे बुंदेलखंड में जिनका डायरेक्ट नेताजी से बात-मुलाकात होती थी? या कभी आप जाते थे कोई काम लेकर उनसे मिलने तो सीधा इंट्री हो जाती थी? या इंतजार करना होता था ? कभी ऐसा हुआ हो कि कोई काम होता था तो नेताजी खुद फोन करते थे ?
सूरज सिंह यादव – नेताजी सामान्य पुरुष नहीं थे। हमारी नजर में वह एक अवतारी पुरुष थे। वह जिस पर भी एक बार हाथ रख देते थे वो उनके मुरीद बन जाता था। उसमें से मैं भी एक था, चंद्रपाल सिंह जी थे, कप्तान सिंह राजपूत थे, शाकिर अली साहब थे, अकबर अली साहब थे, श्री रामपाल थे, गणेश प्रसाद कुशवाहा साहब थे। एक तरीके से हमारे जिले में ये ऐसे लोग थे जो नेताजी के साथ डायरेक्ट टच में रहने वाले लोग थे, जो हमेशा उनसे बात किया करते थे, लखनऊ में जाकर भेंट किया करते थे या उनको अपने जिले स्तर के कार्यक्रम में बुलाते थे।
डॉ. मुलायम सिंह – क्या आपने कभी नेताजी को किसी काम से या क्षेत्र में सभाएं करने के लिए बुलाया?
सूरज सिंह यादव – जिले स्तर के कार्यक्रम होते थे तो उसमें जिला अध्यक्ष जी के बुलाने पर वह आते थे। मैं बराबर उनसे शिष्टाचार भेंट करता था, उनके कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संसाधन और लोगों को जुटाने का काम करता था। कभी-कभी अलग से भी हमारी बात उनसे हुआ करती थी।
डॉ. मुलायम सिंह – नेताजी ने कभी आपसे नहीं कहा कि आप बुंदेलखंड संभालो, वहां चुनाव लड़ो या पार्टी का नेतृत्व करो?
सूरज सिंह यादव – देखिए, नेताजी ने मुझे बहुत प्यार दिया। उन्होंने मुझसे एकबार कहा भी कि आप खुद राजनीति में क्यों नहीं आते? आप राजनीति करिए मैं तो तुम्हारेे साथ हूं, लेकिन मैने कहा कि नेताजी! हमारा बुंदेलखंड बहुत पिछड़ा क्षेत्र है, हमने चंद्रपाल सिंह को नेता मान लिया है, आप कृपा करके इन्हीं पर हाथ रखिए, इन्हीं को आगे बढ़ाइये, इन्ही में हम आपको देखते हैं।
डॉ. मुलायम सिंह – नेताजी जब मुख्यमंत्री बने तो उसके बाद आप नेताजी के साथ संबंधों में क्या बदलाव देखते हैं?
सूरज सिंह यादव – कोई अंतर नहीं रहा। जैसे नेताजी पहले मिलते थे, मुख्यमंत्री होने के बाद भी उन्होंने ऐसे ही हमसे मुलाकात की। पहले की ही तरह मैं गया, मैने पर्ची भेजी या मेरा नाम भी वहाँ पहुँच गया, चाहे जितनी भी भीड़ रही हो, उन्होंने हमें बहुत प्यार से, आदर से अंदर बुलाया, हमसे बात की और हमारी बातों को सुना।

डॉ. मुलायम सिंह – ऐसा नहीं लगा कि नेताजी के मुख्यमंत्री बनने के बाद आप लोग क्षेत्र के बड़े आदमी हो गए? कोई भी क्षेत्र का काम हो, तुरंत करवा सकते थे या नेताजी का आप पर हाथ था तो आप लोग अपने क्षेत्र में किसी काम के लिए पदाधिकारियों को हड़का सकते थे?
सूरज सिंह यादव – देखिये, हम लोगों की कई समस्याएं हुआ करती थी। हमारे क्षेत्र में आवागमन की सबसे बड़ी समस्या थी। नेताजी ने उस समय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत मंडी परिषद की स्थापना की। मंडी परिषद के अंतर्गत ग्रामीण मार्गों को जोड़ने का काम किया जाता था, उसमें कई सड़कें हमने प्रार्थना करके उनसे जुड़वाई और उन्होंने उसको मंजूरी दी। चौधरी शंकर सिंह हमारे जिले के विधायक थे और वो माननीय नेता जी की सरकार में कृषि मंत्री भी थे, वो भी मुझसे पुत्रवत स्नेह करते थे, उनके माध्यम से भी हमने सड़कें बनाने की अपील दी तो उन्होंने सड़कों को जोड़ने का काम किया। कोई भी क्षेत्रीय समस्या होती थी, मान लीजिए पुलिस प्रशासन किसी को अनावश्यकरूप से परेशान कर रहा है, उस समय डकैतों का बाहुल्य था हमारे क्षेत्र में, हमारे यहां लोगों को जबरदस्ती परेशान किया जाता था। खेत मजदूर हैं, जानवर चराने वाले लोग हैं, किसी को अनावश्यक परेशान किया जाता था तो उनकी समस्या को लेकर हम लोगों ने कहा और हमारी बात मानी गयी। गरीब लोगों का कोई भी काम रूकता नहीं था।
डॉ. मुलायम सिंह – यानी आप इतना पावर रखते थे कि आप कोई भी समस्या लेकर जाते थे तो तुरंत समाधान होता था। लेकिन जब नेताजी मुख्यमंत्री नहीं होते थे तब आप लोगों का काम कैसे होता था?
सूरज सिंह यादव – उस दरमियान नेताजी इतनी बड़ी शख्सियत हो गये थे कि उनकी बात को मेरे अंदाज से कभी किसी ने काटा नहीं, चाहे वह कांग्रेस की सरकार रही हो या इसके बाद बहन जी की सरकार आयी, हालांकि उसमें लोग जरूर परेशान रहे, फिर भी नेताजी हमेशा मदद करते थे।
डॉ. मुलायम सिंह – आपका मतलब है कि नेताजी अपने सारे सहयोगियों, जो अलग अलग क्षेत्र में थे, के लिए हमेशा खड़े रहते थे ?
सूरज सिंह यादव – जी! नेताजी हमेशा खड़े रहे। उन्होंने कभी धोखा नहीं दिया। हमेशा उत्साहवर्धन किया और जो मदद बनी उन्होंने किया। हमलोगों कोे एक गार्जियन की तरह मदद करते थे। नेताजी की वजह से समाज में हमारा हौसला बुलंद रहता था। कोई दबाने की कोशिश करता तो बिना डर के नेताजी के भरोसे मुकाबला करते थे। उनके संरक्षण एवं कार्यशैली से हमारा भरोसा हमेशा बुलंद रहता था।
डॉ. मुलायम सिंह – क्या अब उनके निधन के बाद समाजवादी पार्टी में कोई ऐसा नेता है जो उस तरह का सहयोग या संरक्षण करता है जैसा कि नेता जी करते थे ?
मुलायम सिंह – अभी तो हम लोग नेताजी के निधन के बाद बुंदेलखंड में चंद्रपाल सिंह को ही नेता मानते हैं क्योंकि उन्होंने अपने मुख्यमंत्री काल में मिनी मुख्यमंत्री के रूप में चंद्रपाल सिंह जी को स्थापित किया था, तो वही हम लोगों क्षेत्र में मदद करते थे।
डॉ. मुलायम सिंह – मतलब एक तरह से चंद्रपाल जी ही बुंदेलखंड के सर्वमान्य नेता हैं? क्या आप लोग पार्टी की जो भी गतिविधि है उन्हीं के साथ करते हैं?
सूरज सिंह यादव – जी हां! उन्हीं के साथ में करते हैं और उन्हीं के साथ मुख्यमंत्री जी के निर्देशों का पालन होता था। अखिलेश जी जब मुख्यमंत्री बने तो उनके भी निर्देशों का हमेशा पालन हुआ।
नोट– यह साक्षात्कार दिंनाक 10 अप्रैल, 2025 को जिला जालौन के हरदुआ ग्राम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कालर डॉ. मुलायम सिंह द्वारा लिया गया। श्री सूरज सिंह यादव झाँसी जिले के प्रतिष्ठित एवं गठमान्य सख्शियत हैं। जिले के समाजिक तथा राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता के साथ झाँसी जिला अदालत में वकलत करते हैं तथा जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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Great conversation between both of the intellectuals.
बहुत बढ़िया भाई, वाक्य को थोड़ा रोचक और सहज बनाए ।
सरल शब्दों में बहुत ही अच्छा साक्षात्कार
Commendable ground report